40 वर्ष के शिक्षक ने 15वर्षीय छात्रा से ब्याह रचाया गुस्साए लोगों ने बंधन तोड़ के जरिये मदद की गुहार लगाई

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जब एक शिक्षक जिसे हमारे समाज में एक भगवान् का रूप समझा जाता है उसी ने नाटकीय अंदाज़ में जब अपनी ही 15वर्षीय छात्रा से ब्याह रचाया तब लोगों का लड़कियों की शिक्षा और उनके सशक्तिकरण पर से ही विश्वास उठ गया. ऐसा मामला बिहार के सुपौल ज़िले के अंतर्गत नारायणपुर ग्राम का है.
जानकारी के अनुसार लगभग 40 वर्षीय चंद्र प्रकाश मेहता नामक शिक्षक सरायगढ़ भपटियाही के ग्राम नारायणपुर में अपनी कोचिंग सेंटर चलता है. दादाजी नमक इस कोचिंग सेंटर में लगभग 200 छात्र-छात्राएं तीन सो रूपये देकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. इस ग्राम में केवल एक मध्यममिक विद्यालय है जिसमे गांव का कोई भी बच्चा पढ़ने नहीं जाता, केवल खिचड़ी खाने जाता है. पढाई के लिए केवल चंद्र प्रकाश का कोचिंग सेंटर मात्र है.


गुड्डी (बदला हुआ नाम) चंद्र प्रकाश के इसी कोचिंग सेंटर में पढ़ती थी और इस सेंटर का रख रखाव भी करती थी. अत्यंत गरीब परिवार से आने वाली गुड्डी इसी सेंटर में काम करती थी और पढ़ती भी थी. उसका आगे जाने का सपना था. अचानक उसकी मां को ऑपरेशन करने के लिए पैसों की आवश्यकता पड़ी जिसके लिए चंद्र प्रकश ने 80 हज़ार रूपये गुड्डी के परिवार को दिए. इसे के चलते चलते चंद्र प्रकाश मेहता ने गुड्डी को अपने प्यार के लालच में फंसाया और चुप के ब्याह रचा लिया.


गावं वाले बताते हैं की गुड्डी और चंद्र प्रकाश मेहता के बीच की नज़दीकियां सभी को नज़र आ रही थी पर कभी भी किसी ने सोचा भी नहीं की यह नज़दीकियां एक शिक्षक और छात्रा के बीच नहीं बल्कि कुछ और था. इनकी नज़दीकियों के चलते कुछ परिवारों ने अपनी बच्चियों को भी पढाई से निकल लिया था.
परन्तु जब गांव में में चंद्र प्रकाश और गुड्डी के ब्याह की सूचना मिली तब गांव वालों का न केवल पूरा विश्वास डगमगा गया बल्कि सर्कार और प्रशासन पर गुस्सा भी फूट पड़ा. गुस्साए गांव वालों ने अपनी बच्चियों को पूरी तरह से पढाई से निकल लिया और घर पर बैठा लिया. सरकारी विद्यालय तो चलता भी नहीं था. 


ऐसी स्थिति में और गुस्से में ग्राम वासियों ने बंधन तोड़ mobile application के जरिये दनादन SOS दागे जिसके कुछ मिनट बाद ही में जेंडर अलायन्स के सदस्यों ने ग्राम वासियों से संपर्क साधा. ग्राम वासियों का अनुरोध था की नामी महिला एक्टिविस्ट प्रशांति गांव में आएं और लोगों से मिले जिसके तुरंत बाद प्रशांति तिवारी जी के नेत्रतत्व में एक टीम सुपौल के ग्राम नारायणपुर में पहुंची.
वहां पहुँच कर टीम ने गांव के सभी लोगों से बात कर वास्तविकता से अवगत कराया और पाया की नारायणपुर गांव के माध्यमिक विद्यालय में गुड्डी की जन्मतिथि 2003 अंकित है जबकि अन्य दस्तावेज़ों में चंद्र प्रकाश की उम्र 46 वर्ष, जो की लगभग गुड्डी के पिता की उम्र है. गांव वालों ने बताया की गांव में सरकारी स्कूल के न चलते ही उन्होंने ने अपनी बच्चियों को चंद्र प्रकाश के कोचिंग सेंटर में भेजा ताकि वह उन्हें उच्च शिक्षा दे सकें. जब उन्होंने चंद्र प्रकाश मेहता की असलियत जानी तो उन्होंने अपनी बच्चियों को घर बैठा लिया क्यूंकि इस घटना का उनकी बच्चियों पर गहरा दुष्प्रभाव था और उन्हें भी बहकाया जा सकता था.


गांव वासियों ने स्थानीय पुलिस को भी सूचना दी थी पर उन्होंने भी कुछ नहीं किया जिसके चलते गांव वासियों ने बंधन तोड़ से मदद की गुहार लगायी. स्थानीय पुलिस ने जेंडर अलायन्स द्वारा दी गयी तहरीर को भी लेने से मना कर दिया जिसके चलते थाने में काफी गरमा गर्मी हो गयी. गांव वालों के गुस्से के चलते और प्रशांति के आक्रोश के चलते बहुत मजबूरी में थाने में चंद्र प्रकाश मेहता के विरुद्ध बाल विवाह अधिनियम और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया.

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